कौन होती है नारी??
कभी बहु तो कभी बेटी बनकर, घर की रौनक बढ़ाती,
तो कभी माँ या पत्नी बनकर, सबकी खुशियों के लिए अपनी खुशियाँ भूल जाती है।
जिसने बदले में कुछ नहीं चाहा, अक्सर उसका ही लोगो नें फायदा उठा लिया।कभी दहेज़ तो कभी हवस का शिकार बनाते हैं उसे,
अपनी इच्छा के अनुसार पैदा होने से भी रोक देते है उसे।
जिसकी वजह से ये सृष्टि आगे बढ़ती है, केवल उसकी ही खुशी के लिए ये दुनिया क्यों पीछे रहती है।
जो सबकी तकलीफों को सहती है,
सिर्फ उसके ही हिस्से में क्यों इतनी तकलीफ होती है।
ऐ नारी! तू क्यों डरती है इन लोगों से, जो अपनी इच्छाओं के लिए तेरा ही उपयोग करते हैं।
क्यों तू भूल जाती है अपनी शक्ति को? तू अगर देवी है, तो काली, दुर्गा, चंडी का भी रूप ले सकती है।
लक्ष्मी, सरस्वती का रूप होती है नारी,
जो दुसरो के लिए अपना पूरा जीवन निकाल दे, वही होती है नारी, वही होती है नारी।।
हमारे देश में नारी को सदियों से देवी और लक्ष्मी का रूप माना गया है। परंतु फिर भी नारी को आज भी उतना सम्मान और इज़्ज़त नहीं मिलती जो उसे मिलनी चाहिए। नारी हर एक रूप में अपना पूरा फर्ज़ निभाती है। कभी बेटी बनकर तो कभी पत्नी,माँ, बहन बनकर अपना हर कर्तव्य पूरी निष्ठा के साथ निभाती है।
परंतु अभी भी कुछ ऐसे विकृत मानसिकता के लोग ( मर्द ) लोग हैं जो नारी ( पत्नी ), लड़कियों को सिर्फ अपनी इस्तेमाल की वस्तु समझते हैं, वे बस यही सोचते हैं कि वो उनका इस्तेमाल करें, अपमान करें और अपनी जरूरतों को जबरदस्ती पूरा करते रहें। और ऐसे लोग तो स्त्रियों को अपने पैरों कि धूल भर तक ही समझते हैं। ये बस नारी का अपमान कर उनकी आत्मसम्मान और उनकी इज़्ज़त को तार तार करना जानते हैं। एक स्त्री का सम्मान कैसे करना है ये तो इन मर्दो को आता ही नहीं है क्यों कि ये लोग औरत को हमेशा अपने से नीचे और कमज़ोर ही समझते है। परंतु अपना ऐसा व्यव्हार दिखा कर ये खुद साबित कर देते हैं कि वास्तव में वे ही कमज़ोर है। इसलिए ही बस नरियों को ही अपने दुर्व्यवहार का शिकार बनाते हैं। उनके नज़रो में किसी भी नारी का किसी भी रूप में किसी के लिए उनके प्रेम का कोई मोल ही नहीं है।
ये लोग ये क्यों भूल जातें हैं कि एक नारी से पूरी सृष्टि का संचालन होता है। नारी है तभी उनका उस्तित्व इस दुनिया में है। जो किसी अन्य नये जीवन को इस दुनिया में लाती है वह कमज़ोर कैसे हो सकती है।
यही नहीं इस देश में अभी भी कुछ ऐसे परिवार हैं जो बेटियों के जन्म पर शोक मनाते हैं या तो उनका जन्म ही नहीं होने दिया जाता है और जन्म से पहले ही मार दिया जाता है उन्हें। अगर जन्म हो भी जाये तब भी उन्हें उनका बहुत सा हक़ और अधिकार फिर भी नहीं दिया जाता जो अधिकार उन्हें मिलना चाहिए।
पर अब समय आ गया है कि लोगों को ये समझना होगा कि लड़कियों, स्त्रिओं को देवी या लक्ष्मी बोल देने से कुछ नहीं होता। अगर उनको लक्ष्मी का रूप माना या बोला जाता है तो उनके के उसके उनुरूप ही व्यवहार करना होगा, उन्हें सम्मान भी देना होगा तभी इस संसार खुशहाली आएगी और संसार समृद्ध और सुंदर लगेगा।
लोगों को ये समझना होगा कि अगर लोग स्त्रिओं को अपने घर की लक्ष्मी मानकर उनकी ख्वाहिशे और खुशिओं का ख्याल रखेंगे तब ही उनके घर में माँ लक्ष्मी का भी आगमन होगा और घर में स्वयं ही खुशियाँ, सुख, शांती और समृद्धि का वास होगा और घर भी स्वर्ग से भी सुंदर बन जाता है ।
“नारी का सम्मान करें और इज़्ज़त दें। उन्हें उनका अधिकार जरूर दें।”
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